Postal Ballot या डाक मत पत्र क्या होता है और इसका इस्तेमाल कौन करता है?
चुनावों में कुछ लोग जैसे सैनिक, चुनाव ड्यूटी में तैनात कर्मचारी, देश के बाहर कार्यरत सरकारी अधिकारी और प्रिवेंटिव डिटेंशन में रहने वाले लोग चुनावों में मतदान नहीं कर पाते हैं, इसलिए चुनाव आयोग ने चुनाव नियमावली, 1961 के नियम 23 में संशोधन करके इन लोगों को चुनावों में Postal ballot या डाक मत पत्र की सहायता से वोट डालने की सुविधा प्रदान की है.
भारत में चुनाव आयोग की पहल पर भारत में हर चुनाव को फेस्टिवल की तरह मनाया जाता है. यही कारण है कि चुनाव आयोग इस बात को सुनिश्चित करना चाहता है कि हर चुनाव में ज्यादा से ज्यादा मतदान हो अर्थात कोई भी वोटर छूटे ना.
इसी दिशा में चुनाव आयोग ने Postal ballot या डाक मतदान की शुरुआत की है. आइये इस लेख में इसके बारे में विस्तार से जानते हैं|
डाक मतदान (Postal Ballot) क्या होता है?
जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है कि Postal ballot एक डाक मत पत्र होता है. यह 1980 के दशक में चलने वाले पेपर्स बैलेट पेपर की तरह ही होता है. चुनावों में इसका इस्तेमाल उन लोगों के द्वारा किया जाता है जो कि अपनी नौकरी के कारण अपने चुनाव क्षेत्र में मतदान नहीं कर पाते हैं. जब ये लोग Postal Ballot की मदद से वोट डालते हैं तो इन्हें Service voters या absentee voters भी कहा जाता है|
चुनाव में जमानत जब्त होना किसे कहते हैं?
चुनाव में जमानत जब्त उस स्थिति में होती हैं जब कोई उम्मीदवार कुल वैध मतों का 1/6 हिस्सा प्राप्त करने में नाकाम रहता है. ऐसी स्थिति में उम्मीदवार के द्वारा चुनाव आयोग के पास जमा की गयी जमानत राशि जब्त कर ली जाती है. ‘संसदीय निर्वाचन क्षेत्र’के लिए चुनाव लड़ने के लिए 25 हजार रुपये की सिक्यूरिटी राशि और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव लड़ने के लिए 10 हजार रुपये की राशि जमा करनी होती है|
भारत को पूरी दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र माना जाता है. देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था ठीक से चलाने के लिए सामान्यतः 5 वर्ष के अन्तराल पर चुनाव कराये जाते हैं. चुनाव में खड़े होने वाले प्रत्याशियों को चुनाव आयोग के पास कुछ जरूरी कागजात जैसे अपनी क्वालिफिकेशन, आय, वैवाहिक स्थिति आदि के बारे में डिटेल देनी होती है. इसके अलावा चुनाव में पर्चा भरते समय कुछ रुपये भी जमा करने पड़ते हैं जिसे जमानत राशि कहते हैं|
जमानत राशि किसे कहते हैं?
चुनाव का पर्चा भरते समय प्रत्याशियों को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 341 (a) के अनुसार ‘संसदीय निर्वाचन क्षेत्र’ के लिए चुनाव लड़ने के लिए 25 हजार रुपये की सिक्यूरिटी राशि और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव लड़ने के लिए 10 हजार रुपये की राशि जमा करनी होती है|
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 34 1(b) के अनुसार अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के प्रत्याशी को इन दोनों चुनाव के लिए सिर्फ आधी राशि जमा करनी होती है. अतः चुनाव आयोग के पास जमा की गयी इस राशि को ही चुनाव में जमानत कहा जाता है|


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