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Kashi Vishwanath Corridor

 *💁‍♂️👉काशी विश्वनाथ कॉरिडोर (Kashi Vishwanath Corridor) : डेली करेंट अफेयर्स*📚

 


*सन्दर्भ*


🏅🏅हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का लोकार्पण किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह कॉरिडोर भारत को एक निर्णायक दिशा देगा और एक उज्जवल भविष्य की तरफ ले जाएगा।




*प्रमुख बिंदु*


🏅🏅प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा काशी विश्वनाथ धाम के पहले चरण का उद्घाटन किया है। जिसका निर्माण लगभग 339 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है।

इस परियोजना की आधारशिला प्रधानमंत्री द्वारा 8 मार्च 2019 को रखी गई थी।

🏅🏅इस परियोजना में काशी विश्वनाथ मंदिर के आसपास 300 से अधिक संपत्तियों की खरीद और अधिग्रहण किया गया है इसके साथ लगभग 1400 दुकानदारों, किराएदारों और मकान मालिकों का पुनर्वास किया गया है।

इस परियोजना में, काशी खण्डों के 27 मंदिर, जबकि लगभग 127 अन्य मंदिरों का जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण किया जायेगा।

🏅🏅इस परियोजना में पूर्व के सरस्वती गेट के पास 27 मंदिरों की एक मणिमाला बनाई जायेगी यह काम कॉरिडोर के दूसरे चरण में पूरा करने की योजना है।


मंदिर का मुख्य भाग लाल बलुआ पत्थर से बनाया गया है। इसमें 4 बड़े-बड़े गेट लगाए गए हैं।

इसके चारों तरफ़ एक प्रदक्षिणा पथ बनाया गया है। उस प्रदक्षिणा पथ पर संगमरमर के 22 शिलालेख लगाए गए हैं जिनमें काशी की महिमा का वर्णन है।


*परियोजना से लाभ*


🏅🏅परियोजना के प्रथम चरण में कुल 23 भवनों का उद्घाटन किया गया। ये भवन काशी विश्वनाथ मंदिर जाने वाले तीर्थयात्रियों को यात्री सुविधा केंद्र, पर्यटक सुविधा केंद्र, वैदिक केंद्र, मुमुक्षु भवन, भोगशाला, सिटी म्यूजियम, व्यूइंग गैलरी, फूड कोर्ट सहित कई तरह की सुविधाएं प्रदान करेंगे।

यह पर्यटन में विस्तार करेगा तथा विकास एवं विरासत को एक साथ लेकर चलने वाली परियोजना के रूप में एक उदहारण प्रस्तुत करेगा।


*काशी विश्वनाथ मंदिर*



🏅🏅काशी विश्वनाथ भगवान शिव को समर्पित सबसे प्रसिद्ध हिंदू मंदिरों में से एक है।

यह मंदिर गंगा नदी के पश्चिमी तट पर स्थित है और बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है जो शिव मंदिरों में सबसे पवित्र है।

बौद्ध काल में काशी कोसल जनपद में आता था।

🏅🏅मुगल काल के दौरान इस मंदिर को नष्ट कर दिया था। 18वीं शताब्दी में महारानी अहिल्या बाई होल्कर ने इस मंदिर का पुनः जीर्णोद्धार करवाया।

यह मंदिर नागर शैली का उदाहरण है।

*काशी के विषय में*


🏅काशी में गंगा, वरुणा और असी यानी अस्सी नाम की पवित्र नदियां बहती हैं। यहां पर वरुणा और अस्सी नदी के बहने के कारण ही इस नगर को वाराणसी भी कहा जाता है।

यह भारत का सर्वाधिक प्राचीनतम शहर है।

🏅🏅मान्यताओं के अनुसार यह शहर भगवन शिव के त्रिशूल पर बना है। तथा यह शहर शैव परम्परा का महत्वपूर्ण स्थल है।

*नागर शैली*


नागर शैली मंदिर स्थापत्य की एक शैली है। जो उत्तर भारत में प्रचलित है।

सर्वप्रथम इस प्रकार के मंदिरों का निर्माण नगरों में होने के कारण इसका नाम नागर शैली पड़ा।

वास्तु शास्त्र के अनुसार नागर शैली के मंदिरों की पहचान चतुष्कोण आधार, गर्भ गृह, गर्भ गृह के समक्ष अंतराल के बाद मंडप तथा अर्ध मंडप से होती है

🏅🏅शिल्प शास्त्र के अनुसार नागर मंदिरों के 8 प्रमुख अंग हैं


🏅🏅मूल आधार- जिस पर सम्पूर्ण भवन खड़ा किया जाता है।

मसूरक- नींव और दीवारों के बीच का भाग।

जंघा- दीवारें (विशेषकर गर्भगृह की दीवारें)

कपोत- कार्निस

शिखर- मंदिर का शीर्ष भाग अथवा गर्भगृह का उपरी भाग।

ग्रीवा- शिखर का ऊपरी भाग।

वर्तुलाकार आमलक- शिखर के शीर्ष पर कलश के नीचे का भाग।

कलश- शिखर का शीर्षभाग

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